जानिए महादेव भगवान शिव के शिवलिंग का रहस्य ??

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हिन्दू धरम में शिवलिंग (Shivling) का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व:-

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आज के समय में कुछ अज्ञानी लोगो ने परम पवित्र शिवलिंग को जननांग समझ कर पता नही क्या-क्या कल्पित अवधारणाएं फैला रखी हैं। क्या आप जानते हैं कि शिवलिंग का अर्थ क्या होता है और, शिवलिंग किस चीज को दर्शाता है ?

शिवलिंग वास्तव में वातावरण सहित घूमती धरती तथा अनन्त ब्रह्माण्ड (क्योंकि, ब्रह्माण्ड गतिमान है) का अक्स/धुरी (axis) ही है।

दरअसल ये जो गलतफहमी है वो भाषा के रूपांतरण और, तथा हमारे पुरातन धर्म ग्रंथों को नष्ट कर दिए जाने से उत्पन्न हुआ हो सकता है| इसलिए लोगो में मन धडंग बातो ने स्थान ले लिया|

शिवलिंग के अन्य नाम:-

शिवलिंग को कई अन्य नामो से भी संबोधित किया जाता है जैसे प्रकाश स्तंभ/लिंग, उर्जा स्तंभ/लिंग, ब्रह्माण्डीय स्तंभ/लिंग, अग्नि स्तंभ/लिंग, आदि|

इस ब्रह्माण्ड में दो ही चीजे है ऊर्जा और प्रदार्थ| हमारा शरीर प्रदार्थ (पंचत्तव) से निर्मित है जबकि आत्मा एक ऊर्जा है ठीक उसी प्रकार शिव पदार्थ व् शक्ति ऊर्जा का प्रतीक बन कर शिवलिंग कहलाते हैं। ब्रह्मांड में उपस्थित समस्त ठोस तथा उर्जा शिवलिंग में समाती है| अगर इसे धार्मिक की दृष्टि देखे तो हम कह सकते हैं कि शिवलिंग हमारे ब्रह्मांड की आकृति है| जो देवी शक्ति (पार्वती) का आदि-अनादि एक रूप है तथा पुरुष व् प्रकृति की समानता का प्रतीक है|

हमारे पुराणो में कहा जाता है कि प्रत्येक महायुग के पश्चात समस्त संसार इसी शिवलिंग में समाहित (लय) हो जाता है तथा इसी से पुनः सृजन होता है ।सामान्य भाषा में कहा जाए तो उसी आदि शक्ति के आदि स्वरुप (शिवलिंग ) से इस समस्त संसार की उत्पति हुई है तथा उसका यह गोलाकार स्वरुप प्रत्यक्ष अथवा प्ररोक्षरूप से प्राकृतिक अथवा कृत्रिम रूप से हमारे चारों और स्थित है। शिवलिंग का प्रतिरूप ब्रह्माण्ड में हर जगह मौजूद है जैसे आकाश गंगा(पांच -सात -दस नही, अनंत है)| इसलिए इसे एक शर्धा भरी नगरो से देखना चाहिए |

शिवलिंग का शास्त्रों में पूजन विधि

जो मनुष्य किसी तीर्थ की मिटटी से शिवलिंग बना कर उनका विधि-विधान के साथ पूजन करता है, वह शिव-स्वरूप हो जाता है। शिवलिंग का पूजन करने से मनुष्य विद्या, ज्ञान, सद्बुद्धि, सन्तान, धन, धन्य, दीर्घायु और मोक्ष की प्राप्ति करता है। जिस जगह शिवलिंग की पूजा होती है, वह तीर्थ न होने पर भी तीर्थ समान बन जाता है। जिस स्थान पर सर्वदा शिवलिंग का पूजन होता है वह यदि मृत्यु हो जाये तो मनुष्य शिवलोक जाता है। शिव शब्द के उच्चारण मात्र से मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है और उसका बाह्य और अंतकरण दोनों शुद्ध हो जाता है। दो अक्षरों का मंत्र शिव परमब्रह्मस्वरूप एवं तारक है। इससे अलग दूसरा कोई तारक ब्रह्म हो ही नहीं सकता।

बोलो हर हर महादेव               बोलो हर हर महादेव              बोलो हर हर महादेव

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