कबीर के दोहे हिंदी मे – Kabir K Dohe In Hindi

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दुःख मे सुमिरन सब करे सुख मे करे न कोय |
जो सुख मे सुमिरन करे दुःख काहे को होय ||
अर्थ : कबीर दस जी कहते है की दुःख के समय सभी भगवान को याद करते है लेकिन सुख के समय कोई नही करता | यदि हम सुख मे भी भगवान याद करे तो दुःख होगा ही नही |

————-kabir ke dohe———

धीरे – धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय,
माली सींचे सों घडा, ऋतू आए फल होय |
अर्थ: मन मे धीरज रखने से सब कुछ होता है, अगर कोई माली किसी पेड़ को सों घड़े पानी से सींचने लगे तब भी फल तो ऋतू आने पर ही लगेगा !

————kabir ke dohe in hindi————-

पंडित वाद बदे सो झूठा |
राम कहे जगत गती पावे,
खांड कहे मुख मीठा |
अर्थ: जैसे मीठा मीठा कहने से मुहं मीठा नही हो जाता
वैसे ही राम राम जपने से भगवान नही मिलते |

————-kabir das ke dohe in hindi———

कबिरा खड़ा बाजार मे, मांगे सबकी खेर,
ना काहू से दोस्ती, न काहू से बेर |
इस संसार मे आकर कबीर अपने जीवन मे बस यही चाहते है कि
सबका भला हो और संसार मे यदि किसी से दोस्ती नही तो दुश्मनी भी न हो !

————kabir das in hindi———

बोली एक अनमोल है,
जो कोई बोले जानि,
हिये तराजू तोलि के,
तब मुख बाहर आनि |
अर्थ: यदि कोई सही तरीके से बोलना जानता है तो उसे पता है कि वाणी एक अमूल्य रतन है |
इसलिए वह ह्रदय के तराजू मे तोलकर ही उसे मुहं से बाहर आने देता है |

———–kabir das dohe in hindi——-

माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर,
कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर |
अर्थ: कोई व्यक्ति लम्बे समय तक हाथ मे लेकर मोती की माला तो घुमाता है, पर उसके मन का भाव नही बदलता, उसके मन की हलचल शांत नही होती, कबीर की ऐसे व्यक्ति को सलाह है कि हाथ की इस माला को फेरना छोड़ कर मन के मोतियों को बदलो या फेरो |

पोथी पढ़ी पढ़ी जग मुआ, पंडित भया न कोय |
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय ||

अर्थ: बड़ी बड़ी किताबे पढकर संसार मे कितने ही लोग मृत्यु के द्वार पहुंच गए, पर सभी विद्वान न हो सके |
कबीर मानते है कि यदि कोई प्रेम या प्यार के केवल ढाई अक्षर ही अच्छी तरह पढ़ ले | अर्थात प्यार का वास्तविक रूप पहचान ले तो वही सच्चा ज्ञानी होगा |

———-kabir in hindi——-

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