H.I.V. AIDS के बारे में व बचाव जरुर पढ़े. H.I.V. AIDS ke bare mai jankari

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H.I.V. – Human Immune Deficiency Virus

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एड्स जिसे “एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशियंसी सिंड्रोम”. के नाम से भी जाना जाता है| यह रोग चिकित्सकों को जब पता चला जब उनके पास “समलैंगिक sex क्रिया” के कुछ व्यक्ति अपना इलाज कराने आये. उनकी जाच में unisex people की रोगो से लड़ने की शक्ति नष्ट हो चुकी थी. जान लेवा यह बीमारी तब से देशों में बढती जा रही है.

एड्स बे-इलाज क्यों हैं. Aids be-ilaj kyon hai

एड्स में पाए जाने वाला अति सूक्षम H.I.V. रेट्रोवायरस है जिसके दो प्रकार है

टाइप – 1 व  टाइप – II

पहले दोनों को टाइप – III (H.T.L.V. III) माना जाता था.

ये शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (श्वेत रक्त कणिकाओ) को नष्ट कर देते हैं यह शक्ति सफ़ेद कोशाणुओं में विशेष प्रकार के टी 4 लिम्फोसाईट कोशाणुओं में होती है, और इन्ही कोशाणुओं को एड्स का विषाणु H.I.V. नष्ट कर देता है. इसके कारण मनुष्य रोगों से अपना बचाव करने में असमर्थ हो कर कई तरह के रोगों का शिकार हो कर शीघ्र ही मृत्यु को गले लगा लेता है|

aids शरीर में कैसे प्रवेश करता है ? H.I.V. AIDS KAISE HOTA HAI ?

H.I.V. AIDS चार प्रकार से होता है.

1 अप्रकर्तिक यौन सम्बन्ध से 2 प्रदूषित blood से 3  माँ द्वारा गर्भ स्थित बालक में संक्रमण पहुँचने से 4 संकर्मित सुई से

अप्रकर्तिक यौन सम्बन्ध से H.I.V. संक्रमण – UNSAFE SEX SE H.I.V. AIDS

जब व्यक्ति एक से अधिक पुरुष या स्त्रियों से sex करते है, उनमे इस रोग की संभावना ज्यादा होती है, इससे ये रोग संक्रिमित स्त्री पुरुष से यौन क्रिया के समय आगे फैलता जाता है| संक्रमित व्यक्ति में ये वायरस वीर्य या रज के साथ उसके शरीर के सभी तरल पदार्थ में रहता है जैसे उसके खून, आंसू, मूत्र, लार, स्तन के दूध, मस्तिष्क मेरु तरल में इनमे विषाणुओं की संख्या बहुत कम होती है| ये मुंह में छाले हो जाने पर चुम्बन से भी फ़ैल सकता है. ऐसे ही ये वायरस माँ से गर्भ में पल रहे बचचे में व संकर्मित सुई के प्रयोग से फ़ैल जाता है|

H.I.V. AIDS के लक्षण.- AIDS KE LAKSHAN

AIDS में रोगी का वजन घटना शुरू हो जाता है व बार बार दस्त लगते है
हरदम बुखार रहना.
लसिका ग्रंथियों में जेसे गले, कांख, जांघ की ग्रंथियों का सूज जाना|
मुंह व कंठ में छाले होना, खांसी होने के साथ बलगम आना, ऐसे में 70% रोगियों से भी ज्यादा में टी.बी. की शिकायत हो जाती है.
त्वचा के रोग जैसे शरीर में चकते और खुजली होना, त्वचा का पीला पड़ना आदि|
भूख का कम होना व रात में पसीने आना
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से उपरोक्त रोग बने ही रहते हैं. जिससे 2 से 5 वर्ष के भीतर ही मृत्यु आ जाती है. बच्चे तो 2 वर्षो में ही दम तोड़ देते हैं|

गर्भ में शिशु को hiv aids  से बचाने का तरीका. GARBH KE SHISHU KO AIDS SE KAISE BACHAYE

एड्स ग्रस्त माँ के बच्चे को संक्रमण प्रसव के दौरान व स्तन पान के समय लगता है, ऐसे में Delivery normal ना करवा कर Operation से करवानी चाहिए| अगर 8 महीने या उस से भी पहले हो सके तो delivery हो जानी चाहिए. ऐसा करने से बालक को संक्रमण से बचाया जा सकता है|

H.I.V. AIDS में ये घरेलु उपचार करे – HIV AIDS HOME REMEDY

आधुनिक चिकित्शा में H.I.V. AIDS की कोई दवा इजात नहीं है| इसलिए इसके रोगी को सबसे पहले अपनी रोग प्रतिरोधक प्रणाली को मजबूत करना चाहिए|

इसलिए रोगी को रोजाना जितना हो सके प्राणायाम और योग करना चाहिए| और इसके साथ में *तुलसी के पतो का रस (विशेषतय श्याम तुलसी) 5 मिली से 50 मिली तक लेना चाहिए| गिलोय का रस 30 मिली से 100 मिली तक सुबह शाम ले| गेंहू के हलके पीले रंग के जवारे का रस भी रोज़ सुबह शाम 30 मिली से 110 मिली तक पियें|

*इसके साथ में रोगी को जो भी रोग लगे उस का उपचार लेते रहना चाहिए|*

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