Assistant Managers working for 4 months without salary 4 Digital Haryana

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सहायक मेनेजर भी कर रहे बिना वेतन  के काम – जल्द मिलेगा वेतन |

डिजीटल इंडिया पर सरकार खूब जोर दे रही है। लेकिन जिन युवाओं ने प्रदेश के शिक्षा विभाग को डिजीटल स्वरूप दिया उन्हें केंद्र व राज्य सरकार की दुत्कार झेलनी पड़ रही है। पहले केंद्र सरकार ने बजट की दुहाई देकर विभाग में काम कर रहे स्कूल इंफारमेशन मैनेजर्स को नकार दिया। बाद में राज्य सरकार ने अपना काम चलाने के लिए उन्हें दोबारा नियुक्ति तो दे दी लेकिन वेतन नहीं दे पाई। सिम से असिस्टैंट मैनेजर्स (एमआईएस) बने प्रदेश के नौ सौ उम्मीदवारों को चार महीने से वेतन का इंतजार है। नए साल पर सरकार से तोहफा मिलने की उम्मीद भी खोखली साबित हुई। शिक्षा निदेशालय ने नए पद सृजित कर ८५० एएम (एमआईएस) को अक्टूबर महीने में विभिन्न स्कूलों में रि-ज्वाइन कराया।
शिक्षा विभाग को डिजीटल करने का काम करीब नौ सौ सिम ने दिन रात मेहनत कर पूरा किया। सरकारी स्कूलों का कामकाज ऑन लाइन करने का श्रेय स्कूल इंफारमेशन मैनेजर्स को ही जाता है। लेकिन तीन साल काम करने के बाद इनका भविष्य दांव पर लग गया। केंद्र सरकार के मानव संसाधन मंत्रालय ने मार्च २०१६ में इनकी ग्रांट बंद कर दी। इनकी नियुक्ति हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के अधीन जनवरी २०१३ में लिखित परीक्षा के आधार पर हुई थी। जिनके वेतन का आधा भार केंद्र व आधा प्रदेश सरकार वहन करती थी। जून २०१६ में अचानक बजट का बहाना बना कर वेरी शार्ट नोटिस पर इनको स्कूलों में हाजिरी लगाने से मना कर दिया था। इसके बाद इनके पद का नाम बदल कर नए पद सृजत किए गए। ये असिस्टैंट मैनेजर्स चार महीने से बिना वेतन के सरकारी स्कूलों मे काम कर रहे हैं। सरकार हर महीना कोई न कोई नया बहाना बना कर इनसे पूरा महीना काम ले लेती है। जैसे ही महीना पूरा होने पर आता तो इन्हें नए सब्जबाग दिखाने लगती है। इन सहायक मैनेजर्स को अपना परिवार पालना असंभव बन गया है। मानव संसाधन मंत्रालय ने इनकी नियुक्ति डिजीटल इंडिया को बढ़ावा देने के लिए की थी। लेकिन बजट बंद करने से यह सपना कोरा साबित होने लगा।
एक सहायक देखता है ४० स्कूलों का काम:
विभाग ने इन सहायक मैनेजर्स की नियुक्ति कलस्टर स्तर पर कर रखी है। जिसके चलते एक सहायक को १० से ४० स्कूलों तक का काम देखना पड़ता है। यहां तक कि एक सहायक को दूसरे स्कूलों में भी अपने खर्चे पर ही जाना पड़ता है। इस कार्य के अलावा इनको नए प्रोजेक्ट एसडीएमआईएस के तहत अब प्राइवेट व सरकारी स्कूलों के सभी बच्चों का डॉटा आन लाइन करने का काम भी सौंप दिया गया है। जिसमें इनको स्कूल के समय के अतिरिक्त समय देना पड़ रहा है। सरकार के कैशलेस अभियान का जिम्मा भी इनके सिर था। बायोमीट्रिक मशीन चलाने का जिम्मा भी सहायक का ही है।
जिलावार सहायकों की संख्या:
अंबाला- ५०
भिवानी-४८
फरीदाबाद-३२
फतेहाबाद-४७
गुरूग्राम-४३
हिसार-६२
झज्जर-२४
जींद-४९
कैथल-४४
करनाल-५९
कुरूक्षेत्र-४८
महेंद्रगढ़-१८
मेवात-०५
पलवल-३४
पंचकुला-५१
पानीपत-२९
रेवाड़ी-२०
रोहतक-४४
सिरसा-७०
सोनीपत-४८
यमुनानगर-३८
शीघ्र हो जाएगा वेतन जारी-डीपीसी
यमुनानगर डीपीसी सुरेश कुमार ने बताया कि एसपीडी का पद रिक्त होने के कारण वेतन जारी होने में कुछ दिक्कतें आ रही थी। नए एसपीडी एक-दो दिन में ज्वाइन कर रहे हैं। उनके ज्वाइन करते ही सहायकों का वेतन जारी कर दिया जाएगा।

Status in Hindi
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